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मई, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अरनमुला कन्नड़ी दुनिया का सबसे कीमती हस्तनिर्मित धातु दर्पण

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  अरनमुला कन्नड़ी दुनिया का सबसे कीमती हस्तनिर्मित धातु दर्पण मानस दर्पण देख, दोष-गुण स्वयं निहारें। अपने को पहचान, आप ही आप सुधारें।। अवधेश कुमार "अवध" दर्पण का इतिहास काफ़ी पुराना है।दर्पण पारंपरिक रूप से कांच का उपयोग करके बनाए जाते हैं, लेकिन वे कांच से भी लंबे समय से मौजूद हैं। पहले साधारण दर्पण लगभग 600 ईसा पूर्व पॉलिश किए गए ओब्सीडियन से बनाए गए थे। मेसोपोटामिया और मिस्र में 4000 से 3000 ईसा पूर्व के आस-पास तांबे को पॉलिश करके शीशे बनाए गए थे। विरूपण मुक्त छवियाँ बनाने के लिए धातु के दर्पण बनाने की कला पुरानी दुनिया के विभिन्न भागों में लंबे समय से प्रचलित है। 1400 ईसा पूर्व तक, टिन में 30 वज़न प्रतिशत तक युक्त कांस्य का उपयोग दर्पण बनाने के लिए किया जाता था।हमारे भारत में भी तांबे-टिन कांस्य को ढालकर और पॉलिश करके धातु के दर्पण बनाने की कला को अच्छी तरह से समझा जाता था और ये दर्पण अपनी स्पष्टता के लिए बहुत लोकप्रिय थे।ऋग्वेद सहित कई पुराणों में धातु के दर्पण का उल्लेख किया गया है। यहां तक ​​कि कजुराहो की नक्काशी...

पिग्मी: एक अनोखी नीग्रो समूह

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 पिग्मी: एक अनोखी नीग्रो समूह                                                           पिग्मी विश्व कि प्रमुख जनजातियों में से एक है। पिग्मी नीग्राॅयड प्रजाति के अंतर्गत आने वाले समूह है। यह समूह अफ्रीका के कांगो, युगांडा, दक्षिण-पूर्वी एशिया के फिलीपींस के वन क्षेत्रों में पाएं जाते हैं।  पिग्मी शब्द का उपयोग बौने लोगों के समूह को दर्शाने के लिए किया जाता है।यह शब्द छोटे कद के लोगों के सन्दर्भ में इस्तेमाल किया जाता है। पिग्मी जनजाति के लोगों का कद सामान्यत 1 से 1.5 मीटर तक होते हैं, जो विश्व के सभी मानवों में सबसे कम है। पिग्मी जनजाति के लोग अपने जीवन निर्वाह करने के लिए शिकार पर निर्भर होता है। उन्हें कृषि करना या मवेशी पालन करना नहीं आता है। ये लोग वन से खाद्य संग्रह भी करते हैं। इन्हें एकत्रित पौधों के खाद्य पदार्थ के अतिरिक्त भुमिगत भंडारण युक्त आहार प्रिय होते हैं। पिग्मी जनजाति के लोग आखेट करने में कुशल होते हैं। ये गले में ब...

वैलेस रेखा wallace Line

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 वैलेस रेखा                                                       वैलेस रेखा प्राकृतिक वनस्पति व पशु-पक्षियों को विभाजित करने वाली एक काल्पनिक रेखा है जिसे सन् में ब्रिटिश प्रकृतिवादी अल्फ्रेड रसेल वैलेस द्वारा खींची गई थी। यह रेखा एशिया और वालेंशिया के जैव - भौगोंलीक क्षेत्र को पृथक करता  है। यह एशिया और आस्ट्रेलिया के बीच एक संक्रमणकालीन क्षेत्र है जिसे इन्डो-अस्ट्रेलियन द्विप समूह भी कहा जाता है। इस रेखा के पश्चिम में एशियाई प्रजाति के स्तनधारी जीव पाई जाती है और पूर्व में आस्ट्रेलियाई मूल की प्रजातियां पाई जाती है। इन्डों-आस्ट्रेलियन द्विप समूहों की जटिल जैव भुगोल का कारण है चार प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों के विलय विन्दुं और प्राचीन समुद्र तल के संयोजन में अर्ध वो पृथक सूक्ष्म प्लेटों के मध्य पर इसका स्थान। प्रकृतिवादी और जैव वैज्ञानिकों के द्वारा खींची गई वैलेस रेखा 1800 के दशक से द्विप समूहों के वनस्पतियों और जीवों के वितरण पर बाधाओं को चि...

सी ई आई आर ट्रैकिंग प्रणाली

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 सी ई आई आर ट्रैकिंग प्रणाली                         भारत सरकार ने हाल ही में एक ऐसी मोबाईल ट्रैकिंग प्रणाली का शुभारंभ किए हैं जिसके जरिए कोई व्यक्ति अपनी चोरी हुई मोबाईल को भारत के किसी भी कोने से, कोई भी जगह से, आसानी से ब्लॉक और ट्रैक कर सकते हैं। भारतीय सरकार के द्वारा 17 May 2023 में फोन उपयोगकर्ताओं के सुरक्षा ओर बचाव के लक्ष्य से सी ई आई आर ट्रैकिंग प्रणाली का कार्यान्वित किया गया है। सी ई आई आर का पूर्ण अर्थ केन्द्रीय उपकरण पहचान पंजीकृत। दरअसल यह आई एम ई आई नम्बर के द्वारा सम्भव है। आई एम ई आई एक ऐसी संख्या है जिसका उपयोग मोबाईल नेटवर्क पर किसी डिवाइस की पहचान करने के लिए किया जाता है। यह एक अद्वितीय संख्या है। आई एम ई आई नम्बर का सही अर्थ है अतंराष्ट्रीय मोबाईल उपकरण पहचान संख्या। इसमें 15 अंक होते हैं जो फोन कि एक विशिष्ट पहचान है।  भारतीय दूरसंचार विभाग ( DoT) ने मोबाईल फोन निर्माताओं के लिए भारत सरकार के भारतीय नकली डिवाइस प्रतिबंध पोर्टल के साथ भारत में बने सभी हैंडसेट की आई एम ई आई नम्बर को पंजीकृत कर...