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कैम्ब्रियन कल्प (Cambrian Era)
वर्तमान समय में पृथ्वी के भूगर्भिक इतिहास को कई महाकल्प में विभाजित किया गया है। यह कल्प पुनः युगों के रूप में व्यवस्थित किए गए हैं। उल्का पिंडों एवं चन्द्रमा की चट्टानों के नमूनों को रेडियोधर्मी तत्वों के परीक्षण से पृथ्वी कि आयु ४.६ अरब वर्ष अनुमानित किया गया है। पृथ्वी कि इस आयु अवधी को पहले कई महाकल्पो में विभाजित किया गया। उसके बाद महाकल्प को कई युगों में व्यवस्थित किया गया। ओर युग को पुनः शक में विभक्त किया गया है।
पैल्योजोइक महाकल्प या पुराजीवी महाकल्प को प्राथमिक युग कहा जाता है। कैम्ब्रियन कल्प प्राथमिक युग कि एक उपविभाग है।
कैम्ब्रियन कल्प आज से लगभग ६०० मिलियन वर्ष पूर्व प्रारंभ हुआ था। कैम्ब्रियन कल्प पृथ्वी के इतिहास में जीवों के सबसे बड़े विस्तार का समय था। अवसादी शैलों का निर्माण कैम्ब्रियन काल में ही हुआ था। जब पृथ्वी के सतह पर निर्मित खनिज पदार्थ एक दूसरे से टकराकर छोटे छोटे टुकड़ों में टुट जाते हैं तो इसे अवसाद कहते हैं। यह अवसाद दबकर कठोर होकर शैल कि परत बनाते हैं। इस प्रकार की शौल को अवसादी शैल कहा जाता है। भारत में स्थित विंध्याचल पर्वतमाला कैम्ब्रियन कल्प में निर्मित अवसादी शैलों की एक उदाहरण हैं।
कैम्ब्रियन कल्प पृथ्वी के इतिहास में जीवों के सबसे बड़े विस्तार का समय था। ये जीव बिना रीढ़ की हड्डी वाले थे। ये जीव समूद्र में ही रहते थे। कैम्ब्रियन कल्प में भूमि पर कोई जीवन नहीं पाया गया था। कैम्ब्रियन कल्प में आर्कियोसायथिड नामक जीवों को समूद्री लिमस्टोन में जीवाश्म के रूप में पाया गया था।आर्कियोसायथिड संरचनाएं शंक्वाकार या ट्यूबलर आकार में होती हैं और सतही रूप से हॉर्न कोरल के समान होती हैं। आर्कियोसायथिड कंकाल में पतली आंतरिक और बाहरी दीवारें होती हैं, जो लंबवत विभाजन द्वारा समर्थित होती हैं।समुद्रों में शैवाल की उत्पत्ति इस कल्प में ही हुआ था।
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