अरनमुला कन्नड़ी दुनिया का सबसे कीमती हस्तनिर्मित धातु दर्पण
हड़प्पा संस्कृति का मुख्य क्षेत्र सिन्ध और पंजाब में मुख्यतः सिन्धु घाटी में था। वहा से यह दक्षिण और पूर्व की ओर फैली हुई पंजाब, हरियाणा,सिन्ध, बलूचिस्तान, गुजरात, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक पहुंचीं। यह सभ्यता पहली बार सन् 1921में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित आधुनिक स्थल हड़प्पा में खोजी गई थी ओर इसलिए इसे हड़प्पा कहा जाता है।
हड़प्पा संस्कृति की विशेषताः
हड़प्पा संस्कृति को शहरीकरण के रूप में विकसित मानें जातें हैं।हड़प्पा की मुख्य पहचान गढ़ या दुर्ग के रूप में की गई थी जहां पश्चिमी भाग छोटा था लेकिन ऊंचाई पर बना था, और पूर्वी हिस्सा बड़ा था जो निचले हिस्से पर बना था। पुरातत्वविदों का मानना है कि ऊंची हिस्से पर नगर दुर्ग थी ओर निचले हिस्से में निचला-नगर। दोनों हिस्सों की चार दीवारियाॅ पकी ईंटों की बनाई गई थी। कुछ खास तालाब भी बनाया गया था जिसे महान स्नानागार कहते थे।इनको बनाने में ईंट और प्लास्टर की उपयोग की गई थी। इसमें पानी कि रीझाव रोकने के लिए प्लास्टर के उपर चारकोल की परत चढ़ाई जाती थी। तालाब में उतरने के लिए दोनों तरफ से सीढ़ियां बनाई गई थी और चारों ओर कमरे थे। इसमें भरने के लिए पानी कुएं से निकाला गया था और उपयोग के बाद खाली कर दिया जाता था।
हड़प्पा सभ्यता की शिल्प:
हड़प्पा संस्कृति कांस्य के औजारों के निर्माण के अलावा अन्य शिल्प तथा इसके व्यापार और वाणिज्य पर आधारित था। हड़प्पा के लोग पत्थरों के कई औजारों का इस्तेमाल करते थे। पुरातत्वविदों को खोज के दौरान जो चीजें मिली है उनमें अधिकतर पत्थर,शंख, तांबा,कांस, सोना और चांदी जैसी धातु से बना हुआ था । यहां पर मिली सबसे आकर्षक बस्तुओं में मनके,बाट और फलक है।
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