अरनमुला कन्नड़ी दुनिया का सबसे कीमती हस्तनिर्मित धातु दर्पण

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  अरनमुला कन्नड़ी दुनिया का सबसे कीमती हस्तनिर्मित धातु दर्पण मानस दर्पण देख, दोष-गुण स्वयं निहारें। अपने को पहचान, आप ही आप सुधारें।। अवधेश कुमार "अवध" दर्पण का इतिहास काफ़ी पुराना है।दर्पण पारंपरिक रूप से कांच का उपयोग करके बनाए जाते हैं, लेकिन वे कांच से भी लंबे समय से मौजूद हैं। पहले साधारण दर्पण लगभग 600 ईसा पूर्व पॉलिश किए गए ओब्सीडियन से बनाए गए थे। मेसोपोटामिया और मिस्र में 4000 से 3000 ईसा पूर्व के आस-पास तांबे को पॉलिश करके शीशे बनाए गए थे। विरूपण मुक्त छवियाँ बनाने के लिए धातु के दर्पण बनाने की कला पुरानी दुनिया के विभिन्न भागों में लंबे समय से प्रचलित है। 1400 ईसा पूर्व तक, टिन में 30 वज़न प्रतिशत तक युक्त कांस्य का उपयोग दर्पण बनाने के लिए किया जाता था।हमारे भारत में भी तांबे-टिन कांस्य को ढालकर और पॉलिश करके धातु के दर्पण बनाने की कला को अच्छी तरह से समझा जाता था और ये दर्पण अपनी स्पष्टता के लिए बहुत लोकप्रिय थे।ऋग्वेद सहित कई पुराणों में धातु के दर्पण का उल्लेख किया गया है। यहां तक ​​कि कजुराहो की नक्काशी...

महिला समानता दिवस

 महिला समानता दिवस



                                



महिला समानता दिवस हर साल 26 अगस्त को मनाया जाता है। महिला समानता दिवस महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक समानता प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण पदक्षेप है। यह महिलाओं को सशक्त बनाते हैं और समाज में उनके योगदान को मान्यता देते हैं। 



महिला समानता दिवस की शुरुआत अमेरिका से हुई थी। सन् 1920 में अमेरिकी संविधान में 19 वी संसोधन को अधिकारीक तौर पर प्रमाणित करते हुए महिलाओं को वोट देने का अधिकार प्राप्त हुआ था। 26 अगस्त,1920 में अमेरिका के संविधान में 19 वें संसोधन को कांग्रेस द्वारा पारित किया गया था ओर इसे संविधान का हिस्सा बनाया गया था। 26 अगस्त, 1970 को इसकी 50वीं वर्षगांठ मनाई गई, जिसने राष्ट्रीय महिला संगठन (अब) को राज्यव्यापी "समानता के लिए हड़ताल" की वकालत करने के लिए प्रेरित किया।90 से अधिक प्रमुख शहरों में 100,000 से अधिक महिलाएँ इस हड़ताल में शामिल हुईं, जिससे यह अमेरिका में एक ऐतिहासिक लैंगिक समानता विरोध बन गया।अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने 26 अगस्त तिथि को महिला समानता दिवस के रूप में नामित किया और इसे एक अधिकारीक कार्यक्रम के रूप में पहली बार 26 अगस्त,1971 को मनाया गया था। 



महिला समानता दिवस महिलाओं के अधिकारों में हुई प्रगति का उत्सव है। यह महिलाओं के राजनीतिक, अर्थनेतिक के विभिन्न क्षेत्रों में पुर्ण समानता प्राप्त करने के लिए उठाए गये कदमों पर विचार करने का दिन है। इस दिन को आमतौर पर लौगिंक समानता को बढ़ावा देने और समाज में महिलाओं के भुमिका पर चर्चा करने के लिए सेमिनार और वार्ता के साथ मनाया जाता है। इस दिन सभी स्कूल, विश्वविद्यालय और संगठनों के द्वारा विभिन्न शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। विभिन्न संस्कृतिक संस्थानों द्वारा प्रदर्शनियां आयोजित की जाती है, जिसके जरिये विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के योगदान और उपलब्धियों को उजागर किया जाता है। 

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