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शिव शक्ति बिंदु, चन्द्रमा पर भारत की छापं
हालही में भारतीय अंतरीक्ष अनुसंधान संगठन ( इसरो) द्वारा भैजा गया तीसरा भारतीय चन्द्र मिशन चन्द्रयान 3 सफलतापूर्वक चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतर चुका है। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा 26 अगस्त को इसरो के वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए यह कहा: वह बिंदु जहाँ पर भारतीय चन्द्र मिशन चन्द्रयान 3 उतरा था उसे शिवशक्ति के नाम से जाना जाएगा।दरअसल अन्तरीक्ष मिशन के दौरान वह बिंदु जहाँ पर वैज्ञानिकों के द्वारा भैजी हुई अन्तरीक्ष यान उतरता है,उस बिंदु को एक नाम दिए जाने की वैज्ञानिक परंपरा है।भारत भी अपनी अन्तरीक्ष मिशन की कामियाबी पर चन्द्रमा के सतह पर अपना छाप छोड़ते हुए चन्द्रयान की लैडंर विक्रम की उस उतरन बिंदु को शिवशक्ति के नाम से नामांकन किया।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने बेंगलुरु में इसरो टेलीमेटरी ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (ISTRAC) में इसरो वैज्ञानिक और भारत के जनता को संबोधित करते हुए कहा कि चन्द्रयान 3 मिशन की सफलता के बाद पूरी दुनिया भारत की वैज्ञानिक भावना, प्रोद्योगिकी और स्वभाव को पहचान चुके है। उन्होंने चन्द्रमा के सतह पर विक्रम लैंडर की उतरन बिंदु को शिवशक्ति का नाम देते हुए कहा कि शिव में मानवता के कल्याण का संकल्प है, और शक्ति हमे उन संकल्पों को पुरा करने की शक्ति प्रदान करती है।उन्होंने कहा चन्द्रमा पर शिवशक्ति बिंदु हमे हिमालय से कन्याकुमारी तक भारत के एकता का बोध कराता रहेगा। चन्द्रमा के शिवशक्ति बिंदु सदियों तक भारत के वैज्ञानिक और दार्शनिक चिंतन का साक्षी बनेगा।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भारत की अंतरिक्ष एजेंसी है। इसरो पहले भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (INCOSPAR) थी, जिसे 1962 में भारत सरकार द्वारा स्थापित किया गया था, जैसा कि डॉ. विक्रम साराभाई ने कल्पना की थी। इसरो का गठन 15 अगस्त, 1969 को हुआ था और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के लिए विस्तारित भूमिका के साथ INCOSPAR को हटा दिया गया था। अंतरिक्ष विभाग (डीओएस) की स्थापना की गई और 1972 में इसरो को डीओएस के अंतर्गत लाया गया।इसरो/डीओएस का मुख्य उद्देश्य विभिन्न राष्ट्रीय आवश्यकताओं के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का विकास और अनुप्रयोग है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए, इसरो ने संचार, टेलीविजन प्रसारण और मौसम संबंधी सेवाओं के लिए प्रमुख अंतरिक्ष प्रणालियाँ स्थापित की हैं ।
इसरो का मुख्यालय बेंगलुरु में है। इसकी गतिविधियाँ विभिन्न केन्द्रों और इकाइयों में फैली हुई हैं। प्रक्षेपण यान विक्रमसाराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी), तिरुवनंतपुरम में बनाए जाते हैं; उपग्रहों को यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (यूआरएससी), बेंगलुरु में डिजाइन और विकसित किया गया है; उपग्रहों और प्रक्षेपण वाहनों का एकीकरण और प्रक्षेपण सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (एसडीएससी), श्रीहरिकोटा से किया जाता है; क्रायोजेनिक चरण सहित तरल चरणों का विकास तरल प्रणोदन प्रणाली केंद्र (एलपीएससी), वलियामाला और बेंगलुरु में किया जाता है; संचार और रिमोट सेंसिंग उपग्रहों के लिए सेंसर और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग पहलुओं का कार्य अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एसएसी), अहमदाबाद में किया जाता है और रिमोट सेंसिंग उपग्रह डेटा रिसेप्शन प्रसंस्करण और प्रसार का काम राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी), हैदराबाद को सौंपा जाता है।
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