अरनमुला कन्नड़ी दुनिया का सबसे कीमती हस्तनिर्मित धातु दर्पण

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  अरनमुला कन्नड़ी दुनिया का सबसे कीमती हस्तनिर्मित धातु दर्पण मानस दर्पण देख, दोष-गुण स्वयं निहारें। अपने को पहचान, आप ही आप सुधारें।। अवधेश कुमार "अवध" दर्पण का इतिहास काफ़ी पुराना है।दर्पण पारंपरिक रूप से कांच का उपयोग करके बनाए जाते हैं, लेकिन वे कांच से भी लंबे समय से मौजूद हैं। पहले साधारण दर्पण लगभग 600 ईसा पूर्व पॉलिश किए गए ओब्सीडियन से बनाए गए थे। मेसोपोटामिया और मिस्र में 4000 से 3000 ईसा पूर्व के आस-पास तांबे को पॉलिश करके शीशे बनाए गए थे। विरूपण मुक्त छवियाँ बनाने के लिए धातु के दर्पण बनाने की कला पुरानी दुनिया के विभिन्न भागों में लंबे समय से प्रचलित है। 1400 ईसा पूर्व तक, टिन में 30 वज़न प्रतिशत तक युक्त कांस्य का उपयोग दर्पण बनाने के लिए किया जाता था।हमारे भारत में भी तांबे-टिन कांस्य को ढालकर और पॉलिश करके धातु के दर्पण बनाने की कला को अच्छी तरह से समझा जाता था और ये दर्पण अपनी स्पष्टता के लिए बहुत लोकप्रिय थे।ऋग्वेद सहित कई पुराणों में धातु के दर्पण का उल्लेख किया गया है। यहां तक ​​कि कजुराहो की नक्काशी...

मेरी माटी मेरा देश अभियान क्या हैmeri mati mera desh

 मेरी माटी मेरा देश


                                                      



मेरी माटी मेरे देश’ अभियान की शुरुआत भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा की गई है। ये कार्यक्रम 15 अगस्त 2023 को 77वे स्वतंत्रता दिवस के आने के उल्लास में आयोजित किया गया था।आजादी के 75 वर्ष के उपलक्ष में प्रधानमंत्री जी ने अमृत महोत्सव के समापन के लिए इस कार्यक्रम का शुभारम्भ किया था। 





मेरी माटी, मेरा देश अभियान हमारे देश के वीर-वीरांगनाऔ, शहिदों,स्वतंत्रता सेनानीयों को सम्मान देने के लिए एक कार्यक्रम है।हमारे देश के वीर शहीदों ने अपने प्राणों की आहुति देकर हमें स्वतंत्रता दिलाई है। उनकी बलिदान और त्याग ने हमें निष्कलंक स्वतंत्रता की महत्वपूर्णता को सिखाया है। यह अभियान गाँव, पंचायत, ब्लाॅक, शहरी स्थानीय निकाय,राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करके 'जनभागीदारी' को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। 





9 आगस्त,2023 से शुरू की गयी इस अभियान के तहत वीर जवानों के याद में देश के हर एक ब्लॉक से एक कलश मिट्टी दिल्ली में लाया गया और देश के लाखों ग्राम पंचायतों में विशेष शिलालेख लगाया गया ।इन शिलालेख पर वीरों के नाम अंकित किया गया।इनमें स्वतंत्रता सेनानी,रक्षा कर्मी, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस वल और राज्य के पुलिस कर्मियों के नाम शामिल किया गया,जिन्होंने कर्तव्य के दौरान अपनी प्राणों की आहुति दी थी।इस अभियान के अन्तर्गत "अमृत कलश यात्रा" योजना के माध्यम से देश के हर एक कोने से, अलग अलग गाँव से 7,500 कलश में मिट्टी और पौधे दिल्ली में लाया गया।इस मिट्टी और पौधों के कलश से दिल्ली में स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक के पास एक वाटिका तैयार किया जायेगा जिसे अमृत वाटिका के नाम से जाना जायेगा। भविष्य में यह अमृत वाटिका "एक भारत-श्रेष्ठ भारत"का एक भव्य प्रतीक निर्धारित होगी। 






मेरी माटी मेरा देश अभियान की एंथम गीत

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