अरनमुला कन्नड़ी दुनिया का सबसे कीमती हस्तनिर्मित धातु दर्पण

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  अरनमुला कन्नड़ी दुनिया का सबसे कीमती हस्तनिर्मित धातु दर्पण मानस दर्पण देख, दोष-गुण स्वयं निहारें। अपने को पहचान, आप ही आप सुधारें।। अवधेश कुमार "अवध" दर्पण का इतिहास काफ़ी पुराना है।दर्पण पारंपरिक रूप से कांच का उपयोग करके बनाए जाते हैं, लेकिन वे कांच से भी लंबे समय से मौजूद हैं। पहले साधारण दर्पण लगभग 600 ईसा पूर्व पॉलिश किए गए ओब्सीडियन से बनाए गए थे। मेसोपोटामिया और मिस्र में 4000 से 3000 ईसा पूर्व के आस-पास तांबे को पॉलिश करके शीशे बनाए गए थे। विरूपण मुक्त छवियाँ बनाने के लिए धातु के दर्पण बनाने की कला पुरानी दुनिया के विभिन्न भागों में लंबे समय से प्रचलित है। 1400 ईसा पूर्व तक, टिन में 30 वज़न प्रतिशत तक युक्त कांस्य का उपयोग दर्पण बनाने के लिए किया जाता था।हमारे भारत में भी तांबे-टिन कांस्य को ढालकर और पॉलिश करके धातु के दर्पण बनाने की कला को अच्छी तरह से समझा जाता था और ये दर्पण अपनी स्पष्टता के लिए बहुत लोकप्रिय थे।ऋग्वेद सहित कई पुराणों में धातु के दर्पण का उल्लेख किया गया है। यहां तक ​​कि कजुराहो की नक्काशी...

विश्व की द्वीतीय सबसे बड़ी हिन्दू मन्दिर 2nd largest hindu tample of world in hindi

 विश्व की द्वीतीय सबसे बड़ी हिन्दू मन्दिर


                         

                       




 संयुक्त राज्य अमेरिका (यू एस) में निर्मित स्वामी नारायण अक्षरधाम मंन्दिर विश्व की दुसरी सबसे बड़ी हिन्दू मंदिर है। अमेरिका के न्यूजर्सी में 185 एकर भुमि में निर्मित यह मंदिर,भगवान स्वामी नारायण को समर्पित है।मंदिर का निर्माण प्राचीन वेदों या हिंदू धर्मग्रंथों में उल्लिखित दिशानिर्देशों के अनुसार किया गया है। इस भव्य मन्दिर के निर्माण में 12 साल का समय लगा है।12, 500 लोगों ने इस मंदिर के निर्माण में दिन रात अपना श्रमदान किया है।यह मंन्दिर न्युयॉर्क से करीब 96 कि.मी दक्षिण में और वाशिंगटन डीसी के लगभग 290 कि.मी उत्तर दिशा में स्थित है।यह मंन्दिर 255 फीट लंबा,345 फीट चौड़ा और 191 फीट ऊंचा है । 










अक्षरधाम मंन्दिर के परिसर में मुख्य मंदिर के अलावा 12 उप मंन्दिर है।मंन्दिर में 9 शिखर और 9 पिरामिडनुमा शिखर है। मंन्दिर के दिवारों पर भारतीय सभ्यता का कलात्मक झलक दिखाई देती है।दिवारों पर की हुई जटिल नक्काशी, भारतीय संगीत,वाद्ययंत्रों और नृत्य रूपों को दर्शाती है।इस मंन्दिर में 10,000 हजार से अधिक मुर्ति रखी हुई है।मंन्दिर परिसर में एक ब्रह्मकुन्डं बनाया गया है,जो भारत के पवित्र नदीयाँ गंगा,यमुना,भागीरथी,सरस्वती, हुगली,नर्मदा, गोदावरी के संगम स्थल है।इसके निर्माण में 1.9 मिलियन क्यूबिक फीट पत्थर इसके निर्माण में 1.9 मिलियन क्यूबिक फीट पत्थर का उपयोग किया गया है।इस पत्थर को दुनियाभर के 29 से ज्यादा विभिन्न स्थलों से मंगाया गया है।इसमें भारत से ग्रेनाइट और बलुआ पत्थर, म्यांमार से सागौन की लकड़ी, ग्रीच, तुर्की और इटली से संगमरमर,बुल्गारिया से चूना पत्थर लाया गया है। 



                        

                         


मंदिर के भीतर, मूर्तियों , देवताओं की पवित्र छवियों को प्रतिष्ठित किया गया है। केंद्रीय मंदिर में स्वामीनारायण और गुणातीतानंद स्वामी की मूर्तियां हैं , जिन्हें एक साथ अक्षर-पुरुषोत्तम महाराज के रूप में पूजा जाता है। इसी तरह, विभिन्न मंदिरों में राधा और कृष्ण सहित अन्य मूर्तियाँ हैं,शिव और पार्वती,सीता और राम,हनुमान,गणपति,और बीएपीएस गुरुओं की वंशावली जो स्वामीनारायण के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी हैं।









अक्षरधाम मंन्दिर भारत की विरासत और संस्कृति को आधुनिक अमेरिका और पुरे विश्व के सामने प्रस्तुत करता है।अक्षरधाम मंन्दिर अध्यात्म के साथ साथ सभ्यता और संस्कृति का अनोखा संगम है। 

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