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अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव international kite festival
गुजरात में हर साल मकर संक्रांति के दिन पतंग महोत्सव का आयोजन किया जाता है।इसे उत्तरायण पर्व भी कहा जाता है।यह दिन हिन्दू धर्म के लिए बहुत पवित्र माना जाता है और यह भगवान् सूर्य को समर्पित है।पतंग उड़ाना देवताओं को धन्यवाद देने का एक तरीका है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि देवता छह महीने की अवधि के बाद मकर संक्रांति के दिन जागते है।
गुजरात में अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव को राज्य के सबसे भव्य त्योहारों में से एक माना जाता है। राज्य में सालाना 200 त्यौहार मनाए जाते हैं, और पतंग उत्सव या उत्तरायण, मनाए जाने वाले सबसे अद्भुत त्योहारों में से एक है।पतंग युद्ध या मैत्रीपूर्ण पतंग उड़ाना इस त्योहार की प्रमुख आकर्षण है।मकर संक्रांति के अवसर पर मनाया जाने वाला यह उत्सव हर साल लगभग आठ दिनों तक चलता है।गुजरात में पतंग महोत्सव की शुरुआत 1989 से हुई थी।
पतंग महोत्सव की तैयारियां उत्सव से पहले से ही शुरू हो जाते हैं।रसोई में स्वादिष्ट गुजराती व्यंजन जैसे लडडू, उंधियू या सुरती जामुन बनाने की व्यवस्था शुरू हो जाती है, जिन्हें इस दिन समारोहपूर्वक तैयार किया जाता है और खाया जाता है।उत्सव के दिन अधिकांश बच्चे और पुरुष वयस्क पतंग उड़ाने अपनी अपनी छतों पर चढ़ जाते हैं।
पतंग महोत्सव सुबह 5 बजे से ही शुरू हो जाता है और देर रात तक चलते हैं।त्योहार से कुछ दिन पहले, लोग अपने पसंदीदा पतंग निर्माताओं को ढूंढते हैं जो मजबूत, लचीली पतंगें और विशेष रूप से तैयार मांझा नामक डोर तैयार करते हैं, जो प्रतिद्वंद्वी पतंगों के अन्य तारों को काटने के लिए फाइबर के ऊपर गोंद और कांच का संयोजन होता है ताकि इसे जितना संभव हो उतना तेज बनाया जा सके।सभी आकृतियों और आकारों की पतंगें उड़ाई जाती हैं।
इस उत्सव के दौरान देश-विदेश के पर्यटकों से पुरे गुजरात के माहौल रंग विरंगे पतंगों के रंग में रंग जाता है। देश-विदेश के पतंगबाज भी इस उत्सव में हिस्सा लेने के लिए आते हैं और अपनी कलावाजी प्रदर्शित करते हैं।ग्रेट ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, चीन,न्युजीलैंड, इण्डोनेशिया,मलेशिया सहित 40 से भी अधिक देश की पतंगबाज हिस्सा लेते हैं। इस उत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक अनुष्ठान का भी आयोजित किया जाता है।
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