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अरूणाचल प्रदेश के याक चुरपी को मिला जीआई टैग
भारत के उत्तरपूर्वी राज्य अरूणाचल भौगोलिक दृष्टि से उत्तरपूर्व की सबसे बड़े राज्य है।अरूणाचल का अर्थ है, "उगते सूर्य का पर्वत", जिससे अरूणाचल प्रदेश को उगते सूरज की भुमि भी कहा जाता है।प्रदेश की सीमाएँ दक्षिण में असम,दक्षिणपूर्व में नागालैंड,पूर्व में बर्मा/म्यांमार,पश्चिम में भूटान और उत्तर में तिब्बत से मिलती हैं। ईटानगर राज्य की राजधानी है। प्रदेश की बोलचाल की मुख्य भाषा हिन्दी है।पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों की तरह इस प्रदेश के लोग भी तिब्बती-बर्मी मूल के हैं।चावल अरुणाचल प्रदेश के लोगों का प्रमुख भोजन है। यहां के मूल निवासी एक विशेष स्वाद देने के लिए अपने चावल को गर्म कोयलों के ऊपर रखे हुए एक खोखले बांस में पकाना पसंद करते हैं।
अरुणाचल प्रदेश में याक की दुध से बनी चुरपी ने प्रतिष्ठित भौगोलिक संकेत का दर्जा हासिल की है।अरूणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग और तवांग जिले में पाई जाने वाली एक अनोखी याक के नस्ल से तैयार की हुई इस चुरपी को जीआई टैग प्राप्त होने के बाद लोगों की नजरों को आकर्षित किया है।
चुरपी याक की दुध से प्राकृतिक रूप से तैयार किया हुआ पारंपरिक पनीर है। यह पनीर चुरपी, अरूणाचल प्रदेश के आदिवासी समुदायों का मुख्य भोजन है।प्रोटीन से भरपूर यह एक महत्वपूर्ण आहार स्त्रोत है। इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, जिंक, विटामिन ए, विटामिन डी और विटामिन ई है। यह शरीर को गर्म भी रख सकता है, जो ठंडे और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एक वरदान है।नरम छुरपी का स्वाद कच्चे पनीर के समान होता है , लेकिन यह जितनी सख्त होती जाती है, इसका स्वाद उतना ही कम हो जाता है। ऐसा कहा जाता है कि कठोर छुरपी को नरम होने में मिनटों से लेकर घंटों तक का समय लगता है, जिसके बाद धीरे-धीरे घुलने पर इसका स्वाद धुएँ के स्वाद के साथ घने दूधिया ठोस जैसा होता है।
अरूणाचल प्रदेश के याक चरवाहे, मुख्य रूप से पश्चिम कामेंग और तवांग जीलो में ब्रोक्पा और मोनपा जनजाति के लोग चुरपी को ताजे सब्जी के विकल्प के रूप मे व्यवहार करते हैं।चुरपी को सब्जी या मांस करी सहित विभिन्न व्यजनों में शामिल किया जा सकता है।इसे चावल के साथ भी परोसा जाता है।
चुरपी अरूणाचल प्रदेश के लोगों के लिए गहरा सांस्कृतिक महत्व रखता है।पीढ़ियों से चली आ रही पनीर बनाने की प्रक्रिया, इन जनजातियों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रमाण है।
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