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मार्च, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अरनमुला कन्नड़ी दुनिया का सबसे कीमती हस्तनिर्मित धातु दर्पण

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  अरनमुला कन्नड़ी दुनिया का सबसे कीमती हस्तनिर्मित धातु दर्पण मानस दर्पण देख, दोष-गुण स्वयं निहारें। अपने को पहचान, आप ही आप सुधारें।। अवधेश कुमार "अवध" दर्पण का इतिहास काफ़ी पुराना है।दर्पण पारंपरिक रूप से कांच का उपयोग करके बनाए जाते हैं, लेकिन वे कांच से भी लंबे समय से मौजूद हैं। पहले साधारण दर्पण लगभग 600 ईसा पूर्व पॉलिश किए गए ओब्सीडियन से बनाए गए थे। मेसोपोटामिया और मिस्र में 4000 से 3000 ईसा पूर्व के आस-पास तांबे को पॉलिश करके शीशे बनाए गए थे। विरूपण मुक्त छवियाँ बनाने के लिए धातु के दर्पण बनाने की कला पुरानी दुनिया के विभिन्न भागों में लंबे समय से प्रचलित है। 1400 ईसा पूर्व तक, टिन में 30 वज़न प्रतिशत तक युक्त कांस्य का उपयोग दर्पण बनाने के लिए किया जाता था।हमारे भारत में भी तांबे-टिन कांस्य को ढालकर और पॉलिश करके धातु के दर्पण बनाने की कला को अच्छी तरह से समझा जाता था और ये दर्पण अपनी स्पष्टता के लिए बहुत लोकप्रिय थे।ऋग्वेद सहित कई पुराणों में धातु के दर्पण का उल्लेख किया गया है। यहां तक ​​कि कजुराहो की नक्काशी...

हड़प्पा संस्कृति: एक विकसित शहरी सभ्यता

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                                    सिन्धु घाटी में बसा हड़प्पा संस्कृति एक काॅस्य यूगीन सभ्यता माने जाते हैं। सन् 1853 में एक महान उत्खनन कर्ता और खोजी ए.कनिंघम को हड़प्पा संस्कृति के एक मुहर मिला।मुहर एक बैल और छह अक्षर अंकित थे। लेकिन वह इसके महत्व से अनभिज्ञ रहा। बाद में सन् 1921 में भारतीय पुरातत्वविद् दया राम साहनी ने पाकिस्तान इलाके वाले पंजाब के हड़प्पा में खुदाई शुरू की जिसके फलस्वरूप हड़प्पा संस्कृति के विभिन्न स्थलों की प्राचीन वस्तुओं को प्रकाश में आया। वाद में विभिन्न पुरातत्वविदों के द्वारा की गई खोज के दौरान हड़प्पा कांस्य का उपयोग करने वाली संस्कृति के रूप में पहचान की गई। हड़प्पा संस्कृति का मुख्य क्षेत्र सिन्ध और पंजाब में मुख्यतः सिन्धु घाटी में था। वहा से यह दक्षिण और पूर्व की ओर फैली हुई पंजाब, हरियाणा,सिन्ध, बलूचिस्तान, गुजरात, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक पहुंचीं। यह सभ्यता पहली बार सन् 1921में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित आधुनिक स्थल हड़प्पा में खोजी गई थी...

भूटान ड लैंड आफॅ थडंरवोल्ट

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                                                                    भूटान पूर्वी हिमालय के मध्य में बसा दक्षिण एशिया का एक छोटा सा देश हैं जो संस्कृति सम्पन्न और मनमोहक प्राकृतिक सून्दरता से भरपूर है। बौद्ध धर्म भूटान की राजकीय धर्म है। हालांकि कई नागरिक खुले तौर पर हिन्दू धर्म का पालन करते हुए भी दिखाई देता है। वर्ष २०१५ से हिन्दू धर्म को देश कि राष्ट्रीय धर्म भी माना जाता है। भूटान को लैंड आफॅ थडंरवोल्ट कहा जाता क्योंकि यहां अत्यधिक और बढ़े तुफान हिमालय कि घाटी से होकर गुजरती है। भूटान के लोगों का यह मानना है कि बज्र की जगमगाती रोशनी एक अजगर की लाल आंख थी। ड्राक (थंडर द्रेगन ) भूटान की राष्ट्रीय प्रतीक है जो भूटान के नागरिकों के विशिष्ट सिद्धांत पर आधारित है। भूटान की  राजधानी थिम्फू जो दुनिया की पांचवीं सबसे ऊंची राजधानी है। इसे मठों का चहर भी कहा जाता है। थिम्फू भूटान की सबसे बड़ी चहर हैं। यहां की क्षेत्रफल...

स्वर्ण पैगोडा का देश म्यांमार

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स्वर्ण पैगोडा का देश म्यांमार                                                           म्यांमार भारत के पूर्व में स्थित एक प्राकृतिक सून्दरता से भरपूर देश है। यहां पर बर्मा जाती के लोग सर्वाधिक मात्रा में रहते हैं। इसीलिए इसे ब्रम्हदेश भी कहा जाता है। यहां की अधिकतम जनसंख्या बौद्ध धर्मावलम्बी के है। बर्मीज थेरवाद बौद्ध धर्म से ज्यादा प्रभावित हे और यह म्यांमार की राजकीय धर्म है। थेरवाद बौद्ध धर्म की एक शाखा है जो महायान सुत्र की प्रामाणिकता को अस्वीकार करते हैं। यह मठवासी अनुशासन में रूढ़ीवादी प्रवृत्ति रखते हैं।  ब्रम्हदेश में बौद्ध धर्म का प्रसार  सम्राट अशोक की कार्यकाल में बौद्ध धर्म की प्रसार हेतु दो दुत उत्तर एवं सोण धम्मदुत के रूप में ब्रम्हदेश पहूंची। बर्मीज परम्परा के अनुसार उस समय बर्मा के लोगों में एक विपदा आ पड़ी थी। बर्मा के राजमहल में जन्म लेने वाले कुमार को एक राक्षसी आकर खा जाती थी। संयोगवश जिस दिन बौद्ध धर्मदु...