संदेश

नवंबर, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अरनमुला कन्नड़ी दुनिया का सबसे कीमती हस्तनिर्मित धातु दर्पण

चित्र
  अरनमुला कन्नड़ी दुनिया का सबसे कीमती हस्तनिर्मित धातु दर्पण मानस दर्पण देख, दोष-गुण स्वयं निहारें। अपने को पहचान, आप ही आप सुधारें।। अवधेश कुमार "अवध" दर्पण का इतिहास काफ़ी पुराना है।दर्पण पारंपरिक रूप से कांच का उपयोग करके बनाए जाते हैं, लेकिन वे कांच से भी लंबे समय से मौजूद हैं। पहले साधारण दर्पण लगभग 600 ईसा पूर्व पॉलिश किए गए ओब्सीडियन से बनाए गए थे। मेसोपोटामिया और मिस्र में 4000 से 3000 ईसा पूर्व के आस-पास तांबे को पॉलिश करके शीशे बनाए गए थे। विरूपण मुक्त छवियाँ बनाने के लिए धातु के दर्पण बनाने की कला पुरानी दुनिया के विभिन्न भागों में लंबे समय से प्रचलित है। 1400 ईसा पूर्व तक, टिन में 30 वज़न प्रतिशत तक युक्त कांस्य का उपयोग दर्पण बनाने के लिए किया जाता था।हमारे भारत में भी तांबे-टिन कांस्य को ढालकर और पॉलिश करके धातु के दर्पण बनाने की कला को अच्छी तरह से समझा जाता था और ये दर्पण अपनी स्पष्टता के लिए बहुत लोकप्रिय थे।ऋग्वेद सहित कई पुराणों में धातु के दर्पण का उल्लेख किया गया है। यहां तक ​​कि कजुराहो की नक्काशी...

अंकोरवाट क्या है Angkor Wat temple Cambodia hindi

चित्र
का सबसे बड़ा 8 वां अजूबा मंदिर अंकोरवाट                                                 भारत दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू आबादी वाला देश है।भारत में हिन्दुओं की आबादी 1अरब 15 करोड़ के करीब है।यहा की प्राचीन स्थापत्य कला में मंदिरों का विशिष्ट स्थान है।भारत में रामायण काल से अर्थात आज से 7 हजार 200 वर्ष पूर्व ही मंदिरों का प्रमाण मिलता है।रामायण काल से ही हिन्दुओ के लिए मंदिरों का महत्व बहुत खास है।मंदिर हिन्दुओ के लिए न सिर्फ उनकी आराध्य देवताओं की उपासना स्थल थी, बल्कि यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान और बातचीत के केन्द्र है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में 2 मिलियन से अधिक छोटे-बड़े मंदिर हैं।बही भारत में स्थित सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है श्रीरंगम रंगनाथस्वामी मंदिर जो वैष्णव धर्म के सर्वोच्च देवता महा विष्णु को समर्पित है। लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत सबसे बड़ा हिन्दु राष्ट्र होते हुए भी,दुनिया का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर भारत के बाहर स्थापित...

प्रथम अमेरिका चीन युद्धFirst America china War in hindi

चित्र
अफीम युद्ध First Opium War                                                                  अफ़ीम युद्ध और ये संधियाँ उस युग की प्रतीक थीं जिसमें पश्चिमी शक्तियों ने यूरोपीय और अमेरिकी व्यापार के लिए चीनी उत्पादों और बाजारों तक निर्बाध पहुंच हासिल करने की कोशिश की थी।अफ़ीम युद्ध 19वीं सदी के मध्य में चीन में पश्चिमी देशों और किंग राजवंश की सेनाओं के बीच लड़े गए थे , जिन्होंने 1644 से 1912 तक चीन पर शासन किया था। संयुक्त राज्य अमेरिका सहित पश्चिमी व्यापारियों ने लंबे समय से विभिन्न प्रकार के चीनी उत्पादों की मांग की थी। चीन के साथ अमेरिकी व्यापार 1784 में शुरू हुआ, जो महीन कोमल रोवें,चंदन जैसे उत्तरी अमेरिकी निर्यात पर निर्भर था। अंग्रेजों ने पहले से ही दक्षिणी चीन में तस्करी की गई अफ़ीम के लिए एक बड़ा बाज़ार खोज लिया था, और अमेरिकी व्यापारियों ने भी जल्द ही चीन में अपने निर्यात की पूर्ति के लिए अफ़ीम की ओर रुख किया। चीनी स...

मथुरा स्कूल अफ् आर्ट Mathura School Of Art in hindi

चित्र
 मथुरा स्कूल अफ् आर्ट Mathura School Of Art                                                                    मथुरा कला, एक बौद्ध दृश्य कला शैली है, जो कुषाण और गुप्त काल के दौरान मथुरा में विकसित हुआ था।पहली शताब्दी ईस्वी में कुषाण सम्राट कनिष्क के शासनकाल के दौरान , मथुरा कला विद्यालय का विकास हुआ। गुप्त काल (6ठी या 7वीं शताब्दी) के दौरान इस कला ने अपनी पराकाष्ठा प्राप्त की। मथुरा भारत के उत्तरी भाग में कला का केंद्र था। यह उत्तर प्रदेश में आगरा के पास स्थित है। वैदिक महाजनपद काल में मथुरा को सुरसेन के नाम से जाना जाता था। मथुरा कला का सबसे महत्वपूर्ण समय पहली शताब्दी ई.पू. से तीसरी शताब्दी ई.पू. तक माना जा सकता है। गुप्त साम्राज्य के पतन तक मथुरा कला अगले 400 वर्षों तक फलती-फूलती रही।मथुरा कला को कुषाण कला का एक रूप माना जाता है। बुद्ध की छवियों का निर्माण मथुरा कला विद्यालय की एक विशिष्ट विशेषता थी।इसमें बुद...

मृत्यु का रेगिस्तान दश्त-ए मार्गो Desert of Death Dasht-e Margo hindi

चित्र
  मृत्यु का रेगिस्तान दश्त-ए मार्गो Desert of Death                                                             अफगानिस्तान के हेलमंद और निमरूज़ के दक्षिणी प्रांतों में स्थित दश्त-ए मार्गो रेगिस्तान दुनिया का 20वां सबसे बड़ा रेगिस्तान है, और इसमें मुख्य रूप से रेत के ढेर और चट्टानी-मिट्टी वाले मैदान हैं जिनमें सोलोनचैक, ताकीर और शायद ही कभी नखलिस्तान होते हैं।इस मरुस्थल का कुल क्षेत्रफल 1,50,000वर्ग किमी है और इसकी ऊंचाई 500 से 700 मीटर के बीच है।फारसी में 'दश्त' का अर्थ 'रेगिस्तान' और 'मारगो' का अर्थ 'मृत्यु' होता है,इसलिए दश्त-ए-मारगो का मतलब 'मौत का रेगिस्तान' है।दश्त-ए-मारगो रेगिस्तान में 49 डिग्री सेल्सियस तापमान में झिलमिलाती गर्मी की लहरों से भ्रम पैदा होता है।उड़ते बादलों की तरह मृगतृष्णा में प्रतिबिंबित पहाड़ी चोटियाँ तैरती हुई प्रतित होता है , जिस बजह से स्थानीय लोगों ने इसे मौत का रेगिस्तान नाम दिया है।  रेगिस्तान पृथ्...

रहस्यमय जनजाति सेंटिनलीज़ mysterious tribe sentinelese in hindi

चित्र
 सेंटिनलीज़ जनजाति                              हिंद महासागर में उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर रहने वाले सेंटिनलीज़ लोग एक पाषाण युग की जनजाति हैं।निग्रिटो समुदाय की यह जनजाति अनुमानित 60,000 वर्षों से द्वीप पर निवास कर रहे हैं।वे बाहरी लोगों के साथ सभी संपर्कों को सख्ती से अस्वीकार करते हैं।आदिमानव जीवन शैली से अभ्यस्त यह जनजाति उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर पुरे दुनिया से दूर एकांत में वास करते हैं। ये लोग द्वीप पर जंगली सुअर, मनिटर लिजार्ड की शीकार करते हैं,मछली पकड़ते है,नारियल खाते हैं और द्वीप पर मीले विभिन्न प्रकार की फल और पौधे खाते हैं।  सेंटिनलीज़ जनजाति के बारे में दुनिया ने कई वर्षों तक एक नरभक्षी जनजाति के रूप में गलत धारणा ली हुईं हैं।दुसरी शताब्दी में भूगोलवेत्ता क्लोडिअस टोलमी ने अपने लेख में अंडमान निकोबार के द्वीप समूह को उद्देश्य करके लिखा था कि यह द्वीप नरभक्षीयों का द्वीप है।उन्होंने इसी लेख में अंडमान के कुछ द्वीपों को सोभाग्य का द्वीप भी कहा था।      तेरहवीं श...

उधमपुर की कलारी को मिला जीआई टैग udhampur famous recipe Kaladi

चित्र
 उधमपुर की कलारी को मिला जीआई टैग udhampur famous recipe Kaladi                                हालही में जम्मू-कश्मीर के कलारी को प्रतिष्ठित भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग मिला है। इसकी उत्पत्ति जम्मू कश्मीर के उधमपुर जिले के रामनगर क्षेत्र में हुई थी।कलारी एक प्रसिद्ध डोगरा व्यंजन है। कलारी आमतौर पर गाय या भैंस के दूध से बनाई जाती है, हालांकि बकरी के दूध से बनी कलारी भी उपलब्ध होती है, और इसका रंग सफेद होता है। यह दूध को संसाधित करने के बाद बनाया जाता है और जातीय डोगराओं के बीच सबसे अधिक पसंद किया जाने वाला स्ट्रीट फूड स्नैक है।पीढ़ियों से, उधमापुर जिले के रामनगर, चेनानी और पंचारी क्षेत्रों के किसान कलाड़ी बनाकर अपनी आजीविका कमा रहे हैं।कलाड़ी बनाने में उनकी विशेषज्ञता ने इस उत्पाद को लोकप्रिय बना दिया है। जीआई टैगिंग से इस उत्पाद को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने में मदद मिलेगी और क्षेत्र के किसान अधिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे। उधमपुर जिले को दुनिया की सबसे अनोखी चीज़ का घर माना जाता है, ज...

डच रोग क्या है What is Dutch disease

चित्र
 डच रोग क्या है What is Dutch disease                         डच एक अवधारणा है जो एक आर्थिक घटना का वर्णन करती है जहां अर्थव्यवस्था के एक क्षेत्र (विशेष रूप से प्राकृतिक संसाधन) का तेजी से विकास अन्य क्षेत्रों में गिरावट का कारण बनता है।डच रोग एक ऐसी घटना है जो तब घटित होती है जब किसी मूल्यवान प्राकृतिक संसाधन की खोज या दोहन के कारण किसी देश की मुद्रा के मूल्य में अचानक वृद्धि होती है। इसका उपयोग आर्थिक हलकों में विरोधाभासी स्थिति का वर्णन करने के लिए किया जाता है। इसे अक्सर घरेलू मुद्रा की पर्याप्त सराहना की विशेषता भी माना जाता है ।डच रोग शब्द पहली बार 1977 में द इकोनॉमिस्ट पत्रिका में पेश किया गया था।1959 में बड़े प्राकृतिक गैस क्षेत्रों की खोज के बाद नीदरलैंड में आर्थिक स्थिति का विश्लेषण करने के लिए डच शब्द का उपयोग किया गया था। डच रोग की शुरुआत किसी नए संसाधन का दोहन करने के लिए विदेशी नकदी के बड़े प्रवाह से हो सकती है। डच रोग की घटना आम तौर पर उन देशों में होती है जिनकी अर्थव्य...

पंजाबी लोकनृत्य गिद्दा Giddha folk dance

चित्र
 पंजाबी लोकनृत्य गिद्दा Giddha folk dance                               गिद्दा पंजाब में महिलाओं द्वारा किया जाने वाला लोक नृत्‍य है। यह एक खुशनुमा नृत्‍य है, जिसमें एक गोले में बोलियाँ गाई जाती हैं तथा तालियाँ बजाई जाती हैं। दो प्रतिभागी घेरे से निकलकर समर्पण भाव से सस्‍वर बोली सुनाती हैं व अभिनय करती हैं जबकि शेष समूह में गाती हैं।महिलाएं इस नृत्य को मुख्य रूप से उत्सव या सामाजिक अवसरों पर करती हैं ।दरअसल यह नृत्य भांगड़ा की महिला प्रतिरुप है। पंजाब में लोहड़ी के अवसर पर ज्यादातर गिद्दा नृत्य को करते दिखाई देता है।कभी कभी विवाह,मुंडन और तीज जैसे त्योहार के समय भी इस नृत्य को करते दिखाई देता है।  गिद्दा नृत्य के इतिहास के बारे में एसा माना जाता है कि इसकी उत्पत्ति प्राचीन रिंग नृत्य से हुई है।रिंग नृत्य पुराने दिनों में पंजाब में प्रमुख था।गिद्दा नृत्य को करने के लिए किसी वाद्ययंत्र की आवश्यकता नहीं होती।इस नृत्य को महिलाएं खुद ताली बजाकर और संगीत गाकर करते हैं।...

एक राष्ट्र, एक छात्र आईडी One Nation, One Student Id hindi

चित्र
                                                                 एक राष्ट्र, एक छात्र आईडी One Nation, One Student Id हालही में भारत के शिक्षा मंत्रालय और भारत सरकार ने APAAR ID अर्थात "एक राष्ट्र, एक छात्र आईडी" की व्यवस्था शुरू किया है। यह APAAR ID भारत भर के सभी छात्रों के लिए बचपन से ही एक विशिष्ट पहचान प्रणाली के रूप में कार्य करेगी।यह सभी छात्रों के लिए बहुत मददगार होगा क्योंकि उनका पूरा शैक्षणिक डेटा जैसे डिग्री, छात्रवृत्ति, पुरस्कार आदि APAAR आईडी में डिजिटल रूप से स्थानांतरित हो जायेगी।भारत सरकार की "एक राष्ट्र,एक छात्र आईडी" के तहत अबसे किसी छात्र को स्कूल या कॉलेज में प्रवेश लेनी हो,तो पहले वन नेशन वन आईडी पंजीकरण पूरा करना होगा और फिर छात्र आधिकारिक वेबसाइट से एपीएआर आईडी पीडीएफ डाउनलोड कर सकते हैं।                          ...

डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र digital life certificate hindi

चित्र
                      ‌‌‌‌‌‌                                  डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र digital life certificate डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र एक अनलाइन पंजीकरण है, जीसके जरिये एक पेंशनभोगि अपना विवरण प्रदान कर डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते हैं। एक पेंशनर इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) की डोरस्टेप सर्विस के माध्यम से डिजिटल रूप से जीवन प्रमाणपत्र (Life Certificate) जमा कर सकता है।यह एक पेड सर्विस है और सभी पेंशनर्स के लिए 70 रुपये की लागत पर उपलब्ध है।इस सेवा का लाभ उठाने के लिए पेंशनर्स को आईपीपीबी अकाउंट रखने की जरूरत नहीं है।किसी भी बैंक में पेंशन खाता पाने वाला पेंशनर इस सुविधा का लाभ उठा सकता है।यह सेवा पेंशन एंड पेंशनर्स वेलफेयर डिपार्टमेंट, डाक विभाग, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (आईपीपीबी) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय (IPPB) के संयुक्त प्रयासों से देश भर के...

करवा चौथ क्या है karwa Chauth Vrat Katha

चित्र
 करवा चौथ क्या है karwa Chauth Vrat Katha                                              हिन्दू धर्म में करवा चौथ का विशेष महत्व है।इसे करक चतुर्थी भी कहा जाता है।करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए करती हैं।मान्यता है कि महिलाओं द्वारा इस पर्व को करने से इनके पति के सारे संकट दूर हो जाते हैं और दीर्घायु होते हैं।करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक माह के कृष्णा पक्ष के चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है।इस दिन महिलाए निर्जला व्रत रखकर अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं।यह एक समर्पण का त्यौहार है।     करवा चौथ के दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चन्द्रोदय तक निर्जला व्रत रखते हैं।शाम के समय चन्द्रमा के निकलते ही स्त्रियाँ एक छलनी लेकर चन्द्रमा की दर्शन करके,चन्द्रमा को अर्घ्य देती है।उसके बाद उसी छलनी से अपने पति को निहारते है,और पति के हाथों से जल ग्रहण करके अपनी व्रत तोड़ते है।छलनी पर एक दिया रखी जाती है।छलनी का मूहं पत्नी क...